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कोलकाता में इस समलैंगिक जोड़े ने हिंदू रीति रिवाज से धूमधाम से रचाई शादी

कोलकाता। में हुई एक शादी देशभर के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है. ये शादी गे कपल (Gay Couple) होने की वजह से काफी सुर्खियां बटोर रही है. फैश...








कोलकाता। में हुई एक शादी देशभर के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है. ये शादी गे कपल (Gay Couple) होने की वजह से काफी सुर्खियां बटोर रही है. फैशन डिजाइनर अभिषेक रे  अपने पार्टनर चैतन्य शर्मा  की शादी का आयोजन काफी धूमधाम भरा रहा. इस शादी ने LGBTQ+ कम्यूनिटी के लिए भी समाज की नई धारा से जुड़ने की उम्मीद पैदा कर ही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये शादी हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुई. इसमें पंडित ने मंत्रोच्चार किया तो वहीं जोड़े ने एक दूसरे को वरमाला भी पहनाई. इसके साथ ही कपल ने पवित्र अग्नि के सामने फेरे भी लिए.

हालांकि, ये कोई पहला मौका नहीं है जब कोलकाता शहर समलैंगिक शादी का गवाह बना है, 
ये पहला मौका है जब शादी में हिंदू रीति-रिवाज का पालन कर शादी किया गया. 
अभिषेक रे ने TOI से बात करते हुए कहा कि ‘LGBTQ+ समुदाय में ज्यादातर लोग लीव इन में रहते हैं या फिर घर पर ही छोटा सा फंक्शन आयोजित कर साथ रहने लगते हैं. लेकिन हमने शादी करना तय किया. मैंने चैतन्य को कहा कि हमें इसे कुछ इस तरह करना चाहिए कि ये हमारे परिवार और दोस्तों के लिए यादगार रहे.
अभिषेक आगे कहते हैं ‘ये शादी बंगाली और मारवाड़ी परिवार के बीच हुई, इसी वजह से दोनों ही परिवारों के रीति-रिवाज शादी में आयोजित हुए.’ बता दें कि इस समलैंगिक शादी के फोटोज़ सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए.
We Do’ साइन बोर्ड का प्रयोग
शादी में शामिल हुए फैशन डिजाइनर नवोनिल दास ने कहा कि जैसा कि शादी के साइनबोर्ड में दो आदमी कहते हैं ‘We Do’, ये देखने वालों के मन में जिज्ञासा पैदा करती है. रे और शर्मा अच्छी तरह से जानते हैं कि भारत में गे मैरिज कानूनी तौर पर पहचान नहीं रखती है और शादी रजिस्टर भी नहीं हो सकती है, लेकिन ये कोई आपराधिक कृत्य नहीं है.

समलैंगिक शादियां भारत में कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं हैं. 
शादी कराने वाले पंडित ने कही ये बात
रे और शर्मा की शादी कराने वाले पंडित भी इस अनूठी शादी को ‘extremely Progressive’ मानते हैं. उनके अनुसार ये गे कपल एक ‘नया रास्ता दिखाने वाले’ हैं. उन्होने ये भी कहा कि शादी के दौरान उन्हें जेंडर स्पेसिफिकेशन की वजह से कई बार मंत्रोच्चार करने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ा था.